शरीर ही शरीर से प्रेम करता

 

शरीर ही शरीर से प्रेम करता है?

क्या प्रेम का परिणाम संभोग है या कि प्रेम भी गहरे में कहीं कामेच्छा ही तो नहीं? फ्रायड की मानें तो प्रेम भी सेक्स का ही एक रूप है. किशोर अवस्था में प्रवेश करते ही लड़के और लड़कियों में एक-दूसरे के प्रति जो आकर्षण उपजता है उसका कारण उनका विपरीत लिंगी होना तो है ही, दूसरा यह कि इस काल में उनके सेक्स हार्मोंस जवानी के जोश की ओर दौड़ने लगते हैं. तभी तो उन्हें राजकुमार और राजकुमारियों की कहानियां अच्छी लगती हैं. फिल्मों के हीरो या हीरोइन उनके आदर्श बन जाते हैं.

आकर्षित करने के लिए जहां लड़कियां वेशभूषा, रूप-श्रृंगार, लचीली कमर एवं नितम्ब प्रदेशों को उभारने में लगी रहती हैं, वहीं लड़के अपने गठे हुए शरीर, चौड़े कंधे और रॉक स्टाइलिश वेशभूषा के अलावा बहादुरी प्रदर्शन के लिए सदा तत्पर रहते हैं. आखिर वह ऐसा क्यूं करते हैं? क्या यह यौन इच्छा का संचार नहीं है? वे कहते हैं कि प्रेम तो दो आत्माओं का मिलन है. तब फिर 'मिलन' का अर्थ क्या? शरीर का शरीर से मिलन या आत्मा का आत्मा से मिलन में क्या फर्क है? प्रेमशास्त्री कहते हैं कि देह की सुंदरता के जाल में फंसने वाले कभी सच्चा प्रेम नहीं कर सकते.

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